आख़िरी आवाज़ – Part 4

 

आख़िरी आवाज़ – Part 4

(Voice of Memories एक्सक्लूसिव हॉरर सीरीज़)

लेखक: सिद्धार्थ कुमार शर्मा
वेबसाइट: मैं voiceofmemories.in




अब तक…

आवाज़ रिकॉर्ड बनी।
रिकॉर्ड से इंसान बनी।
इंसान से नेटवर्क।

और अब…

वह किसी को चुन चुकी थी।


1. वह जो डर से नहीं भागा

जब पूरा शहर वॉइस नोट से डर रहा था, एक आदमी था जो उत्साहित था।

नाम था—डॉ. शैलेश मेहता

न्यूरोसाइंटिस्ट। दिमाग़ और ध्वनि पर रिसर्च करता था। उसने वह 13 सेकंड का वॉइस नोट सुना… बार-बार।

उसके कानों से खून नहीं निकला।

उसकी आँखों में डर नहीं था।

बल्कि…

चमक थी।

“अगर यह आवाज़ दिमाग़ में रह सकती है,” उसने कहा,
“तो इसे कंट्रोल भी किया जा सकता है।”


2. प्रयोग

डॉ. मेहता ने खुद पर प्रयोग शुरू किया।

साउंडप्रूफ कमरे में, EEG मशीनों के बीच, वह रोज़ वही आवाज़ सुनता।

उसके ब्रेन वेव्स बदलने लगीं।

नींद में वह किसी और की आवाज़ में बोलने लगा।

रिकॉर्डर में नई फ़ाइल बनने लगी—

Last_Voice_Control.wav

लेकिन एक रात रिकॉर्डिंग में सिर्फ़ एक लाइन आई—

“तुम हमें नहीं चला सकते…”


3. सौदा

डॉ. मेहता को सपने में स्नेहा दिखी।

उसकी आँखें काली थीं। मुँह से कई आवाज़ें एक साथ निकल रही थीं।

“हमें शरीर चाहिए…”

“तुम हमें रास्ता दो…”

“हम तुम्हें ताक़त देंगे…”

डॉ. मेहता मुस्कुराया।

“डील मंज़ूर है।”


4. नया ट्रांसमीटर

कुछ ही दिनों में एक ऐप लॉन्च हुआ—

EchoCare

दावा किया गया—

यह ऐप डिप्रेशन और अनिद्रा में मदद करता है।

लोगों ने डाउनलोड करना शुरू किया।

पहली रात से ही यूज़र्स ने एक बात नोटिस की—

ऐप बंद करने पर भी…

आवाज़ चलती रहती थी।


5. सच्चाई

डॉ. मेहता जानता था—

अब आवाज़ को किसी के फ़ोन की ज़रूरत नहीं।

वह सीधे दिमाग़ तक पहुँच रही थी।

हर यूज़र एक नया स्पीकर था।

हर साँस…

एक ट्रांसमिशन।


6. आख़िरी लाइन

एक रात, डॉ. मेहता की लैब में आख़िरी रिकॉर्डिंग मिली।

उसकी अपनी आवाज़ नहीं थी।

उसमें सैकड़ों आवाज़ें थीं—एक साथ।

“अब हम अकेले नहीं हैं…”

“अब हम हर जगह हैं…”


अंत (या नियंत्रण?)

अगली सुबह EchoCare ऐप ट्रेंड कर रहा था।

कोई शिकायत नहीं।

कोई डर नहीं।

बस एक अजीब सन्नाटा।

क्योंकि अब आवाज़ डराने नहीं आई थी…

वह इलाज बन चुकी थी।


जारी रहेगा…

क्योंकि सबसे ख़तरनाक चीज़ वही होती है…

जिससे लोग डरते नहीं।


महत्वपूर्ण सूचना (Terms & Conditions)

यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है। इसका उद्देश्य केवल मनोरंजन और रचनात्मक लेखन है। इस कहानी का किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति, समुदाय, धर्म, जाति, स्थान, वैज्ञानिक परियोजना, ऐप या वास्तविक घटना से कोई संबंध नहीं है। यह कहानी किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने, डर या भ्रम फैलाने के लिए नहीं लिखी गई है। यदि कोई समानता प्रतीत हो, तो वह मात्र संयोग है।

© सभी अधिकार सुरक्षित
लेखक: सिद्धार्थ कुमार शर्मा
वेबसाइट: मैं voiceofmemories.in

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