बरगदपुर की मोहब्बत 🌾(एक ऐसी प्रेम कहानी जो समाज की दीवारों से बड़ी निकली)

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🌾 बरगदपुर की मोहब्बत 🌾

(एक ऐसी प्रेम कहानी जो समाज की दीवारों से बड़ी निकली)


1. गाँव की मिट्टी और दो दुनिया

झारखंड के एक छोटे से गांव का नाम था बरगदपुर। गाँव के बीचों-बीच एक पुराना बरगद का पेड़ था, जिसके नीचे पंचायत बैठती थी। उसी पेड़ की छांव में फैसले होते थे—कभी खेत का, कभी पानी का, कभी इज्जत का।

बरगदपुर के मुखिया थे रामप्रसाद सिंह। उनका परिवार गाँव में सबसे मान-सम्मान वाला था। पक्का घर, दो ट्रैक्टर, बड़ा खेत, और पंचायत में सबसे ऊँची आवाज़। उनकी इकलौती बेटी थी – काजल। काजल पढ़ी-लिखी, संस्कारी और बेहद सुंदर थी। उसकी मुस्कान में सादगी थी और आंखों में सपने।

गाँव के दूसरे छोर पर कच्चे घरों की बस्ती थी, जहाँ लकड़हारे रहते थे। वहीं रहता था राजू। उसका पिता जंगल से लकड़ी काटकर लाता और बाजार में बेचता। राजू भी बचपन से इसी काम में हाथ बंटाता। रंग साँवला, बदन मेहनत से मजबूत, और दिल साफ जैसे नदी का पानी।

दोनों की दुनिया अलग थी—एक तरफ सत्ता और सम्मान, दूसरी तरफ संघर्ष और मेहनत।


2. पहली मुलाकात

एक दिन सावन का महीना था। हल्की बारिश के बाद हवा में मिट्टी की खुशबू फैली थी। काजल अपनी सहेलियों के साथ नदी किनारे गई थी। पैर फिसल गया और वह पानी के तेज बहाव में गिर पड़ी।

सहेलियां घबरा गईं। उसी वक्त राजू लकड़ी के गट्ठर के साथ उधर से गुजर रहा था। उसने बिना एक पल सोचे नदी में छलांग लगा दी। तेज बहाव से जूझते हुए उसने काजल को किनारे तक पहुंचाया।

काजल की आंखें डर से बंद थीं। जब उसने आंख खोली तो सामने राजू खड़ा था—भीगा हुआ, सांस फूलती हुई।

“तुम ठीक हो?” राजू ने धीरे से पूछा।

उस दिन से काजल के दिल में एक नया एहसास जागा।


3. बढ़ता अपनापन

कुछ दिनों बाद मंदिर का मेला लगा। पूरा गाँव उमड़ा हुआ था। काजल अपनी माँ के साथ आई थी। राजू दूर खड़ा चुपचाप मेले को देख रहा था।

अचानक बिजली चली गई। अंधेरे में भगदड़ मच गई। किसी ने काजल का दुपट्टा खींच दिया। वह डर गई। तभी राजू ने आकर उसे सुरक्षित जगह पहुंचाया।

धीरे-धीरे दोनों की नज़रें मिलने लगीं। खेतों के बीच पगडंडी पर चलते हुए, मंदिर के आँगन में, और बरगद के पेड़ की छांव में – उनकी मुलाकातें बढ़ती गईं।

राजू कभी ज्यादा बातें नहीं करता, लेकिन उसकी आंखों में सच्चाई थी। काजल को उसका सादा स्वभाव अच्छा लगता।


4. समाज की दीवार

एक दिन किसी ने दोनों को साथ देख लिया। बात मुखिया जी तक पहुंची।

रामप्रसाद सिंह का गुस्सा आसमान छू गया।
“मेरी बेटी एक लकड़हारे से मिलेगी? ये कभी नहीं होगा!”

राजू के घर संदेश भिजवाया गया—“अपने बेटे को समझा दो, वरना अच्छा नहीं होगा।”

राजू के पिता ने उसे समझाया,
“बेटा, हम गरीब हैं। हमारा मुकाबला बड़े घर से नहीं है।”

लेकिन राजू ने कहा,
“बाबा, मैंने कोई गलत काम नहीं किया। मैं काजल से सच्चा प्रेम करता हूँ।”


5. तूफान

काजल को घर से निकलना बंद कर दिया गया। उसकी शादी शहर के एक अमीर परिवार में तय करने की बातें चलने लगीं।

काजल ने रोते हुए माँ से कहा,
“माँ, प्यार में ऊँच-नीच नहीं होती। राजू बुरा नहीं है।”

इधर राजू ने ठान लिया कि वह खुद को साबित करेगा। उसने लकड़ी काटने के साथ-साथ गाँव के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। अपने मेहनत के पैसों से एक छोटा सा टीन का शेड बनाकर “ग्राम शिक्षा केंद्र” खोला।

धीरे-धीरे गाँव के लोग उसका सम्मान करने लगे।


6. परीक्षा की घड़ी

एक साल बाद गाँव में भयंकर सूखा पड़ा। तालाब सूख गए, खेत बंजर हो गए।

रामप्रसाद सिंह का बड़ा खेत भी पानी के बिना सूख रहा था। उसी समय राजू ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर पास के पहाड़ी नाले से पानी लाने की योजना बनाई।

दिन-रात मेहनत कर उन्होंने नाला खोद दिया। बारिश आई तो पानी सीधे गाँव के खेतों तक पहुँच गया।

मुखिया जी के खेत भी बच गए।


7. दिल का बदलाव

बरगद के पेड़ के नीचे पंचायत बैठी। पूरा गाँव इकट्ठा हुआ।

रामप्रसाद सिंह खड़े हुए और बोले,
“आज इस गाँव को बचाने वाला कोई बड़ा जमींदार नहीं, बल्कि एक लकड़हारे का बेटा है। राजू ने जो किया, वह हम सबके लिए मिसाल है।”

फिर उन्होंने राजू को आगे बुलाया।

“बेटा, तुमने साबित कर दिया कि असली बड़प्पन दिल और कर्म से होता है, खानदान से नहीं।”

काजल की आंखों में आँसू थे।

मुखिया जी ने सबके सामने घोषणा की,
“अगर काजल की खुशी राजू में है, तो मुझे यह रिश्ता मंजूर है।”

गाँव तालियों से गूंज उठा।


8. विवाह और नई सुबह

कुछ महीनों बाद बरगदपुर में बड़ी धूमधाम से शादी हुई। काजल लाल जोड़े में सजी थी और राजू साधारण लेकिन गरिमामय वर की तरह खड़ा था।

दूल्हा-दुल्हन ने बरगद के पेड़ के नीचे प्रण लिए—
“हम साथ रहेंगे, चाहे परिस्थिति कैसी भी हो।”

शादी के बाद राजू ने अपना शिक्षा केंद्र बड़ा कर दिया। काजल ने भी बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। मुखिया जी ने गाँव के लिए नया स्कूल बनवाया।

धीरे-धीरे बरगदपुर में बदलाव आने लगा।
अब लोग खानदान से पहले इंसानियत देखते थे।


समाप्ति का संदेश

यह कहानी सिर्फ काजल और राजू की नहीं, बल्कि उस सोच की है जो बदल सकती है।
प्यार में अगर सच्चाई और मेहनत हो, तो समाज की दीवारें भी गिर जाती हैं।

बरगदपुर आज भी वही है, लेकिन बरगद के पेड़ के नीचे लिया गया वह फैसला आज भी लोगों को याद दिलाता है—

“सच्चा प्यार कभी हारता नहीं।” ❤️


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