काली पहाड़ी का आख़िरी रास्ता – Part 2
भूमिका (Recap)
काली पहाड़ी का रास्ता सुबह खुला था, लेकिन आदित्य मल्होत्रा गायब था। गांव वालों को सिर्फ़ एक ही चीज़ मिली—पहाड़ी पर बने पुराने अस्पताल के रजिस्टर में दर्ज एक नया नाम:
डॉ. आदित्य मल्होत्रा
लोगों ने इसे इत्तेफाक कहा। कुछ ने अफ़वाह। लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज़्यादा गहरी थी।
अध्याय 1: जांच की शुरुआत
आदित्य के गायब होने के तीन दिन बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। एक छोटी टीम बनाई गई, जिसकी ज़िम्मेदारी सौंपी गई इंस्पेक्टर मीरा चौहान को।
मीरा अंधविश्वास में भरोसा नहीं करती थी। उसके लिए हर रहस्य का जवाब काग़ज़ों और तथ्यों में छिपा होता था।
लेकिन जैसे ही उसने काली पहाड़ी का नाम सुना, बुज़ुर्ग अफ़सरों ने फ़ाइल बंद कर दी।
"यह केस आसान नहीं है," किसी ने धीरे से कहा।
अध्याय 2: टूटी फ़ाइलें
पुराने रिकॉर्ड रूम में मीरा को अस्पताल से जुड़ी कई फ़ाइलें अधूरी मिलीं। मरीजों की लिस्ट, डॉक्टरों के नाम—सब जगह खाली पन्ने।
सिर्फ़ एक रिपोर्ट पूरी थी—
"बिजली कटौती के कारण आपात सेवाएँ असफल रहीं।"
उस रिपोर्ट पर हस्ताक्षर थे, लेकिन नाम पढ़ा नहीं जा सकता था।
अध्याय 3: चौकीदार की रात
मीरा ने रामसहाय से दोबारा बात की। इस बार वह पहले से ज़्यादा डरा हुआ था।
"उस रात मैंने ऊपर से रोशनी देखी," रामसहाय ने कहा। "अस्पताल तो बंद था, फिर भी।"
"और आवाज़ें?" मीरा ने पूछा।
रामसहाय ने सिर हिलाया। "इलाज की।"
अध्याय 4: खुला रास्ता
उस रात, ठीक 2:13 बजे—काली पहाड़ी का रास्ता अपने आप साफ़ हो गया। जंग लगा बोर्ड ज़मीन पर गिर पड़ा।
मीरा ने इसे संयोग नहीं माना। वह टीम के साथ पहाड़ी पर चढ़ गई।
हवा में अजीब-सी दवाइयों की गंध थी।
अध्याय 5: जिंदा अस्पताल
अस्पताल के भीतर बिजली नहीं थी, लेकिन गलियारों में हल्की रोशनी फैली हुई थी। जैसे दीवारें खुद चमक रही हों।
दीवारों पर नए हाथों के निशान थे—ताज़ा।
मीरा को एहसास हुआ—यह जगह कभी बंद नहीं हुई थी।
अध्याय 6: आदित्य की आवाज़
ऑपरेशन थिएटर के पास मीरा को एक आवाज़ सुनाई दी—
"मरीज को अकेला मत छोड़ो।"
ये आदित्य की आवाज़ थी। रिकॉर्डिंग नहीं—ज़िंदा।
लेकिन वहां कोई नहीं था।
अध्याय 7: अधूरी मौतें
मीरा को सच्चाई समझ आने लगी। उस रात लोग मरे नहीं थे। बिजली चली गई, रास्ता बंद कर दिया गया, और मदद जानबूझकर नहीं पहुंचाई गई।
जिन्हें बचाया जा सकता था, उन्हें छोड़ दिया गया।
और अब वो जगह… इलाज मांग रही थी।
अध्याय 8: नई ड्यूटी
मीरा को अस्पताल के रजिस्टर में कई नए नाम दिखे। सबके आगे एक ही शब्द लिखा था—
"On Duty"
आदित्य का नाम सबसे ऊपर था।
अध्याय 9: लौटने का मौका
अचानक रास्ते पर सुबह की धूप फैल गई। जैसे पहाड़ी उसे जाने का मौका दे रही हो।
पीछे से आदित्य की आवाज़ आई—
"अगर गईं, तो ये कभी खत्म नहीं होगा।"
अध्याय 10: फैसला
मीरा ने रेडियो बंद किया। टीम को नीचे भेज दिया।
वह अस्पताल के भीतर लौट गई।
रजिस्टर में एक नया नाम जुड़ गया—
इंस्पेक्टर मीरा चौहान
निष्कर्ष (Cliffhanger)
आज भी काली पहाड़ी का रास्ता सुबह खुलता है।
लेकिन अब रात में अस्पताल की खिड़कियों में दो परछाइयाँ दिखती हैं।
कहते हैं—जब तक आख़िरी मरीज ठीक नहीं हो जाता…
ड्यूटी खत्म नहीं होती।
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Disclaimer: यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है। किसी वास्तविक व्यक्ति, स्थान या घटना से इसका कोई संबंध नहीं है।
