काली पहाड़ी का आख़िरी रास्ता – Part 3 (Final)
भूमिका (Recap)
Part 2 में इंस्पेक्टर मीरा ने काली पहाड़ी पर अस्पताल की गहराई में ड्यूटी संभाली। उसने महसूस किया कि रात में अस्पताल ज़िंदा हो उठता है, और आदित्य मल्होत्रा की आवाज़ लगातार सुनाई देती थी।
रास्ता खुला, लेकिन सच्चाई अब भी वहीं थी—जो मरे नहीं, वे अब तक इंतज़ार कर रहे थे।
अध्याय 1: रात का बुलावा
रात के 2:13 बजे, मीरा अकेली अस्पताल की गलियों में थी। टॉर्च की रोशनी फैल रही थी, लेकिन हर दीवार से हल्की हंसी, धीमी फुसफुसाहटें आतीं।
कहीं से आवाज़ आई—
"ड्यूटी पूरी करो…"
मीरा ने झटका खाया, लेकिन कदम आगे बढ़ाए।
अध्याय 2: अस्पताल का रहस्य
मीरा ने अस्पताल के पुराने ऑपरेशन थिएटर में देखा—मरीजों के नाम वाली पुरानी फ़ाइलें जमीन पर बिखरी थीं।
सबके सामने एक ही बात थी—हर मौत को रोकना संभव था, लेकिन फ़ाइलें दबा दी गईं।
अब हर रात अस्पताल उन्हें याद दिला रहा था।
अध्याय 3: आदित्य का संदेश
मीरा ने टॉर्च के नीचे कैमरा लगाया। अचानक स्क्रीन पर आदित्य की झलक दिखाई दी—सिर्फ़ एक सेकंड के लिए।
"अब तुम समझ गई हो… इलाज नहीं मिला, इसलिए जगह हमेशा जीवित है।"
अध्याय 4: अजीब गतिविधि
दीवारों पर हाथों के निशान चमक उठे। मीरा को लगा—कोई उसे घेर रहा है।
किंतु कोई आक्रामक नहीं था। बस इंतज़ार था। इंतज़ार किसी की देखभाल करने की।
अध्याय 5: रात का सच
मीरा ने महसूस किया कि अस्पताल का समय अपने आप चलता है। जो लोग मरने के बजाय भुला दिए गए, अब खुद को डॉक्टर मानते हैं।
सभी रात में ज़िंदा हैं, लेकिन सिर्फ़ ड्यूटी निभाने के लिए।
अध्याय 6: अंतिम निर्णय
सुबह की पहली किरण के साथ रास्ता खुल गया। मीरा को समझ आया—अगर वह जाए, तो ड्यूटी अधूरी रहेगी।
वह अंदर लौट गई और फ़ाइलों की जाँच शुरू कर दी।
अध्याय 7: नए नाम की शुरुआत
रजिस्टर में मीरा का नाम दर्ज किया गया—
इंस्पेक्टर मीरा चौहान (On Duty)
आदित्य मल्होत्रा का नाम अब ऊपर नहीं था। उसने अपनी ड्यूटी पूरी कर ली थी।
अध्याय 8: रात के बाद की शांति
पहाड़ी पर अस्पताल की खिड़कियों से अब हल्की रोशनी आती थी। परछाइयाँ शांत थीं।
रास्ता दिन में खुला रहता था। रात आते ही केवल मीरा और कुछ पुराने डॉक्टर वहाँ मौजूद होते हैं—रात की ड्यूटी निभाने के लिए।
निष्कर्ष (Final Conclusion)
काली पहाड़ी का रास्ता अब भी सुरक्षित है।
रात के समय अस्पताल ज़िंदा है, लेकिन अब कोई डराने वाला नहीं।
कहते हैं—जो ड्यूटी पूरी करता है, उसे पहाड़ी छोड़ देता है।
लेकिन जब तक कोई इलाज का इंतज़ार करता है, ड्यूटी खत्म नहीं होती।
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Disclaimer: यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है। किसी वास्तविक व्यक्ति, स्थान या घटना से इसका कोई संबंध नहीं है।
