झूमके वाली रात – Part 2 पिछली कहानी से आगे…

 

झूमके वाली रात – Part 2

लेखक: सिद्धार्थ कुमार शर्मा
वेबसाइट: मैं voiceofmemories.in


पिछली कहानी से आगे…

राहुल गायब हो चुका था।

लोगों ने कहा—शायद कहीं चला गया होगा। पुलिस ने कहा—कोई सबूत नहीं है।

लेकिन उस सड़क ने…

कुछ और ही कहना शुरू कर दिया।


1. दूसरी आवाज़

राहुल के गायब होने के ठीक सात दिन बाद, उसी फैक्ट्री में काम करने वाला अमन नाइट शिफ्ट से लौट रहा था। समय फिर वही—12:40 बजे

सड़क वही। सन्नाटा वही।

और इस बार…

झूमका नहीं।

बल्कि एक मोबाइल फ़ोन पड़ा था।

स्क्रीन ऑन थी।

वॉलपेपर पर राहुल की फोटो।

अमन का दिल बैठ गया। उसने जैसे ही मोबाइल उठाया—स्क्रीन पर कॉल आने लगी।

Incoming Call: Rahul

काँपते हाथों से अमन ने कॉल उठाई।

दूसरी तरफ़ धीमी, टूटी हुई आवाज़ थी—

“मैं… यहाँ हूँ…”

“वो मुझे पहनना चाहती है…”

पीछे से किसी औरत के हँसने की आवाज़ आई। कॉल कट गया।

मोबाइल की स्क्रीन पर एक लाइन उभरी—

“अब बारी तुम्हारी है।”


2. झूमका लौट आया

अगली सुबह वही झूमका फिर से सड़क किनारे पड़ा मिला।

इस बार…

उस पर सूखा हुआ खून था।

लोगों ने उसे हटाने की कोशिश की। किसी ने पत्थर से फेंका, किसी ने डंडे से।

लेकिन हर बार झूमका…

अगली रात फिर उसी जगह मिल जाता।

और अब एक नई बात होने लगी थी—

रात में लोग एक लड़के को औरत की आवाज़ में रोते सुनने लगे।


3. वह जो आधी रह गई

गाँव के सबसे बूढ़े आदमी ने सच्चाई बताई।

उस लड़की का नाम था कमला। उसकी शादी तय हुई थी। झूमके उसी शादी के लिए खरीदे गए थे।

हत्या की रात, उसने झूमके पहने थे। एक झूमका छीन लिया गया… दूसरा सड़क पर गिर गया।

“मरते वक़्त उसकी एक ही इच्छा थी,” बूढ़े ने कहा।
“कोई उसका झूमका पूरा करे।”

“जो उसे पूरा करेगा…”

“वही उसका होगा।”


4. राहुल की झलक

अमन को राहुल सपनों में दिखने लगा।

राहुल अब वैसा नहीं था। उसके कान में झूमका लटका था। उसकी आँखें खाली थीं।

वह हर बार बस एक ही बात कहता—

“उसे दो… दूसरा झूमका…”

अमन की नींद, भूख, होश—सब खत्म होने लगे।

आईने में अब उसे अपने पीछे कमला दिखने लगी।

और उसके कान…

अब खाली नहीं थे।


5. आख़िरी कोशिश

अमन ने फैसला किया—झूमके को श्मशान में जलाया जाएगा।

आधी रात, श्मशान की आग, मंत्र… सब तैयार था।

जैसे ही झूमका आग में डाला गया—

हवा तेज़ हो गई।

आग बुझ गई।

और राख के बीच से एक आवाज़ आई—

“मैं अधूरी नहीं जलती…”

पीछे मुड़कर अमन ने देखा—

राहुल खड़ा था।

और उसके दोनों कानों में झूमके थे।


6. हस्तांतरण

सुबह लोग श्मशान पहुँचे।

अमन नहीं मिला।

लेकिन एक चीज़ मिली—

राहुल का मोबाइल।

स्क्रीन पर एक नई फोटो थी—

अमन, खाली आँखों के साथ।

और नोटिफ़िकेशन:

“Transfer Complete.”


अंत (या शुरुआत?)

आज भी वह झूमका कभी-कभी दिखाई देता है।

कभी सड़क पर।

कभी किसी सपने में।

लोग कहते हैं—

अगर तुम्हें किसी की आवाज़ में अपना नाम सुनाई दे,

तो पीछे मत देखना।

क्योंकि झूमका अब सिर्फ़ याद नहीं माँगता…

वह उत्तराधिकारी ढूँढता है।


महत्वपूर्ण सूचना (Terms & Conditions)

यह कहानी पूर्णतः काल्पनिक है। इसका उद्देश्य केवल मनोरंजन और रचनात्मक लेखन है। इसका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति, समुदाय, स्थान, धर्म या घटना से कोई संबंध नहीं है। यह कहानी किसी प्रकार से किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने, डर या नकारात्मकता फैलाने के लिए नहीं लिखी गई है। यदि कहानी का कोई अंश वास्तविक प्रतीत हो, तो वह मात्र संयोग है।

© सभी अधिकार सुरक्षित
लेखक: सिद्धार्थ कुमार शर्मा
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