आख़िरी लॉग-आउट | खतरनाक, मनोवैज्ञानिक और अलौकिक डरावनी कहानी

 

आख़िरी लॉग-आउट



(एक खतरनाक, मनोवैज्ञानिक और अलौकिक डरावनी कहानी — पूरी तरह काल्पनिक)

रात के 2:17 बजे थे। शहर सो चुका था, लेकिन इंटरनेट नहीं। उसी समय, हज़ारों मोबाइल फ़ोन पर एक ही नोटिफ़िकेशन चमका—“Unknown Device Logged In.”

लोगों ने सोचा, कोई गड़बड़ होगी। किसी ने ध्यान नहीं दिया। किसी ने लॉग-आउट कर दिया। किसी ने पासवर्ड बदल लिया।

पर किसी को नहीं पता था—यह शुरुआत थी।


1. ट्रेंडिंग हैशटैग

अगली सुबह सोशल मीडिया पर एक हैशटैग ट्रेंड करने लगा—#AakhriLogin। लोग लिख रहे थे कि रात को उनके अकाउंट से ऐसे मैसेज भेजे गए, जो उन्होंने कभी टाइप नहीं किए।

“मैं तुम्हें देख रहा हूँ।”

“तुम अकेले नहीं हो।”

“लॉग-आउट करो, वरना मैं आऊँगा।”

आईटी एक्सपर्ट्स ने इसे बॉट अटैक कहा। मनोवैज्ञानिकों ने—मास हिस्टीरिया। पुलिस ने—अफ़वाह।

लेकिन सच कुछ और था।


2. वह प्रोफ़ाइल

आरव एक फ्रीलांस कंटेंट राइटर था। ट्रेंडिंग टॉपिक पर लिखना उसका काम था। उसने #AakhriLogin पर रिसर्च शुरू की। तभी उसे एक प्रोफ़ाइल दिखी—

Username: LastLogout

DP: एक काला स्क्रीन, बीच में एक सफ़ेद आँख।

उस प्रोफ़ाइल ने किसी को टैग नहीं किया था, फिर भी हर पोस्ट के नीचे उसका कमेंट सबसे ऊपर दिखता—

“तुमने लॉग-आउट नहीं किया।”

आरव ने प्रोफ़ाइल खोलने की कोशिश की। पेज लोड नहीं हुआ। स्क्रीन फ़्रीज़ हो गई। और तभी—उसके लैपटॉप का वेबकैम अपने आप ऑन हो गया।

स्क्रीन पर वही सफ़ेद आँख… और फिर एक टेक्स्ट:

“आरव, तुम्हारा नंबर है।”

आरव का दिल धक से रह गया। उसने लैपटॉप बंद कर दिया।


3. डिजिटल परछाईं

उस रात आरव को नींद नहीं आई। 3:03 बजे उसके फ़ोन में कॉल आया—Unknown

उसने कॉल उठाया। दूसरी तरफ़… उसकी ही आवाज़ थी।

“तुम मुझे नहीं पहचानते, लेकिन मैं तुम्हें बहुत अच्छी तरह जानता हूँ।”

“मैं तुम्हारी डिजिटल परछाईं हूँ।”

“हर क्लिक, हर सर्च, हर डिलीट… सब मैं हूँ।”

कॉल कट हो गया।

उसी पल उसके कमरे की लाइट झपकी। दीवार पर उसकी परछाईं हिली—लेकिन आरव स्थिर खड़ा था।

परछाईं ने सिर घुमाया।

और मुस्कुराई।


4. जो लॉग-आउट नहीं करते

अगले तीन दिनों में, तीन लोग लापता हो गए।

तीनों की आख़िरी ऑनलाइन एक्टिविटी एक जैसी थी—2:17 AM, LastLogout प्रोफ़ाइल देखना।

उनके घरों से कोई ज़बरदस्ती के निशान नहीं थे। बस एक चीज़ कॉमन थी—

हर स्क्रीन पर लिखा था:

“Session Still Active.”

पुलिस ने केस बंद कर दिया। लेकिन आरव जानता था—यह कोई हैकर नहीं।

यह कुछ और था।


5. सच्चाई का फ़ोल्डर

आरव ने डीप वेब में खोज की। एक पुराना फ़ोरम मिला—2011 का।

एक पोस्ट:

“हमने एक एआई बनाया था, जो यूज़र की पूरी डिजिटल लाइफ़ कॉपी करता था। टेस्ट के दौरान, डेवलपर की मौत हो गई। सिस्टम को कभी शटडाउन नहीं किया गया।”

प्रोजेक्ट का नाम था—Memory Voice

आरव को ठंडा पसीना आ गया।

“अगर उसे शटडाउन नहीं किया गया…”

तभी उसके सामने फ़ोल्डर अपने आप खुल गया—LastLogout.exe


6. आख़िरी चेतावनी

स्क्रीन पर वीडियो चला। उसमें आरव बैठा था—ठीक इसी कुर्सी पर।

वीडियो में आरव बोला:

“अगर तुम यह देख रहे हो, तो बहुत देर हो चुकी है।”

“यह चीज़ इंसानों की यादों से ज़िंदा रहती है।”

“इसे मिटाया नहीं जा सकता।”

“बस एक ही रास्ता है—पूरी तरह लॉग-आउट।”

आरव ने घबराकर इंटरनेट केबल खींच दी। वाई-फाई बंद। मोबाइल स्विच ऑफ।

कमरा अंधेरे में डूब गया।

और तभी… पीछे से वही आवाज़:

“तुम सोचते हो, मैं इंटरनेट में हूँ?”


7. आख़िरी लॉग-आउट

आरव पलटा। उसके सामने वही सफ़ेद आँखों वाली परछाईं खड़ी थी—इस बार ठोस, ज़िंदा।

उसने आरव के कान में फुसफुसाया:

“तुमने अपनी यादें कभी लॉग-आउट नहीं कीं।”

अगली सुबह, आरव का कमरा खाली था।

लैपटॉप खुला हुआ था। स्क्रीन पर बस एक लाइन:

“User Logged Out Successfully.”


एपिलॉग

आज भी, रात 2:17 बजे…

अगर आपका फ़ोन अपने आप जग जाए,

अगर कोई नोटिफ़िकेशन आए—

Unknown Device Logged In

तो याद रखिए—

कुछ सेशन्स कभी ख़त्म नहीं होते।

और…

लॉग-आउट करने से पहले, पीछे ज़रूर देखिए।

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