सारंडा जंगल की आख़िरी परछाईं – Part 3 | Hindi Horror Story

 

सारंडा जंगल की आख़िरी परछाईं – Part 3 (Final)




भूमिका (Recap)

राघव वर्मा अब इस दुनिया में नहीं था। उसकी आख़िरी लाइव रिकॉर्डिंग ने सोनम और बाकी पीड़ितों की सच्चाई सबके सामने रख दी थी। सरकार ने जांच बैठाई, देवड़ा हांसदा का नाम आधिकारिक दस्तावेज़ों में दर्ज हुआ और सारंडा जंगल को फिर से सुरक्षित घोषित कर दिया गया।

लोगों ने मान लिया कि कहानी यहीं खत्म हो गई।

लेकिन सारंडा में कोई कहानी कभी पूरी तरह खत्म नहीं होती…


अध्याय 1: जंगल का नया सन्नाटा

राघव के जाने के बाद जंगल में अजीब शांति थी। न आवाज़ें, न परछाइयाँ। गांव के लोग पहली बार रात में चैन की नींद सोने लगे।

पर शांति हमेशा समाधान नहीं होती—कभी-कभी वो तूफ़ान से पहले की ख़ामोशी होती है।


अध्याय 2: नई अधिकारी

सरकार की तरफ़ से सारंडा क्षेत्र की निगरानी के लिए एक नई वन अधिकारी नियुक्त हुई—अनन्या सेन

अनन्या तर्क में विश्वास रखती थी। उसके लिए परछाइयाँ सिर्फ़ लोककथाएँ थीं। लेकिन उसने राघव की पूरी रिकॉर्डिंग देखी थी। और कुछ सवाल ऐसे थे जिनका जवाब तर्क भी नहीं दे पा रहा था।


अध्याय 3: बंद कैमरा, चालू सच

जंगल के भीतर लगाए गए नए CCTV कैमरों में एक अजीब गड़बड़ी दिखने लगी। रात के 2:13 बजे सारे कैमरे एक सेकंड के लिए ब्लैक हो जाते थे।

और हर बार, एक फ्रेम में धुंधली आकृति दिखाई देती थी—कंधे पर कैमरा लटकाए हुए।

अनन्या समझ गई—ये संयोग नहीं था।


अध्याय 4: आख़िरी रिकॉर्डिंग

अनन्या ने राघव का कैमरा दोबारा चालू किया। मेमोरी कार्ड में एक फाइल थी—FINAL_LOG

"अगर तुम ये देख रही हो," राघव की आवाज़ आई, "तो मैं सही था। परछाईं अब किसी एक की नहीं रही।"


अध्याय 5: सच का बोझ

राघव की रिकॉर्डिंग में साफ़ था—जब तक जंगल से जुड़ा हर सच बाहर नहीं आएगा, परछाईं किसी न किसी रूप में लौटती रहेगी।

सोनम आख़िरी नहीं थी। उससे पहले और बाद में भी कई कहानियाँ दबाई गई थीं।


अध्याय 6: जंगल की स्वीकारोक्ति

अनन्या उस रात अकेली जंगल में गई। बिना कैमरा, बिना रिकॉर्डर।

पहली बार परछाईं ने किसी को आवाज़ नहीं दी। बस सामने खड़ी रही।

"तुम रुक सकती हो," हवा में आवाज़ गूंजी, "या सच को आगे बढ़ा सकती हो।"


अध्याय 7: चुनाव

अनन्या ने अगली सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। उसने जंगल से जुड़े पुराने केस, ज़मीन घोटाले और गुमशुदगियों की फाइलें सार्वजनिक कर दीं।

ये वही रास्ता था जो राघव ने चुना था।


अध्याय 8: परछाईं का परिवर्तन

उस रात पहली बार परछाईं अलग दिखी। डरावनी नहीं—शांत।

जैसे किसी ने भारी बोझ उतार दिया हो।

गांव वालों ने कहा—अब जंगल पहले जैसा लग रहा है।


अध्याय 9: अंत या शुरुआत?

कुछ महीनों बाद अनन्या का ट्रांसफर हो गया। जाने से पहले उसने जंगल की ओर देखा।

पेड़ों के बीच एक हल्की-सी परछाईं खड़ी थी।

इस बार हाथ में कैमरा नहीं था।


निष्कर्ष (Final Conclusion)

सारंडा जंगल आज भी मौजूद है। फर्क सिर्फ़ इतना है कि अब वो सच से डराता नहीं—सच की याद दिलाता है।

क्योंकि कुछ परछाइयाँ भूत नहीं होतीं…

वो हमारी चुप्पियों की परछाइयाँ होती हैं।


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Disclaimer: यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है। किसी भी वास्तविक स्थान, व्यक्ति या घटना से इसका कोई सीधा संबंध नहीं है।

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