भूतेली हवेली की रात – Part 3 (Final)
भूमिका (Recap)
Part 2 में राहुल हवेली में फंसा हुआ था। तस्वीरों और परछाइयों ने उसे घेर लिया। सुबह होने पर पुलिस और हवेली के मालिक आए, लेकिन राहुल का कोई सुराग नहीं मिला। सिर्फ़ तस्वीरों में उसकी जगह जुड़ गई।
अध्याय 1: रात का बुलावा
रात 2:13 बजे, हवेली फिर से जिंदा हो उठी। परछाइयाँ हल्की रोशनी में दिखाई देने लगीं।
राहुल की तस्वीर अब तस्वीरों में स्थिर नहीं थी। उसकी परछाई हिल रही थी, जैसे वह खुद अंदर जीवित हो।
अध्याय 2: अनजान साये
राहुल ने महसूस किया—उसके पीछे हवेली की छाया उसे घेर रही है। कमरे की दीवारों से हल्की फुसफुसाहटें आईं—
"हम तुम्हें स्वीकार करते हैं।"
राहुल डर के बजाय एक अजीब शांति महसूस करने लगा। हवेली चाहती थी कि वह भी एक ड्यूटी निभाए।
अध्याय 3: पुरानी डायरी
राहुल ने लॉबी में डायरी उठाई। उसमें लिखा था—
"जो भी हवेली में रात बिताएगा, उसकी तस्वीर हमेशा जीवित रहेगी।"
लेकिन एक नया नियम भी था—जो डर के बजाय ड्यूटी निभाए, वह हवेली में सुरक्षित रहेगा।
अध्याय 4: नई ड्यूटी
राहुल ने फैसला किया। वह अब केवल तस्वीर का हिस्सा नहीं बनेगा। उसने कैमरा और नोटबुक रखी और हवेली की हर आवाज़ और परछाई की निगरानी शुरू की।
अध्याय 5: सुबह का रहस्य
सुबह पुलिस और हवेली के मालिक आए। अंदर किसी का नाम नहीं मिला।
लेकिन तस्वीरों में अब चार लोग थे—राहुल भी शामिल था। उसकी आँखों में डर नहीं, बल्कि जिम्मेदारी की चमक थी।
अध्याय 6: हवेली की शांति
अब भूतेली हवेली रात को डराती नहीं। परछाइयाँ शांत थीं। रात में ड्यूटी निभाने वाले केवल वे ही थे, जिनकी तस्वीरें हवेली में थीं।
हवेली का डर अब केवल नए आगंतुकों के लिए था।
निष्कर्ष (Final Conclusion)
भूतेली हवेली अब सुरक्षित है। रात में ज़िंदा है, लेकिन कोई आक्रामक नहीं। जो व्यक्ति डर को छोड़कर जिम्मेदारी निभाता है, वह हवेली की शांति का हिस्सा बन जाता है।
क्या आप वहां रात बिताने की हिम्मत कर सकते हैं, या आपकी तस्वीर भी हवेली में जुड़ जाएगी?
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Disclaimer: यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है। किसी वास्तविक व्यक्ति, स्थान या घटना से इसका कोई संबंध नहीं है।
