आख़िरी आवाज़ – Part 2

 

आख़िरी आवाज़ – Part 2

(Voice of Memories एक्सक्लूसिव हॉरर सीरीज़)

लेखक: सिद्धार्थ कुमार शर्मा
वेबसाइट: मैं voiceofmemories.in




पिछली कड़ी से आगे…

नीरज जा चुका था।

लेकिन उसकी आवाज़…

अब अकेली नहीं थी।


1. नई फ़ाइल

रेडियो स्टेशन की सुबह की शिफ्ट में अजीब सन्नाटा था। नीरज की कुर्सी खाली थी। रिकॉर्डर ऑन था।

कंप्यूटर स्क्रीन पर एक नई फ़ाइल अपने आप सेव हो चुकी थी—

Last_Voice_002.wav

स्टेशन की नई प्रोड्यूसर स्नेहा ने फ़ाइल खोली।

हेडफ़ोन लगाते ही उसकी साँस अटक गई।

इस बार आवाज़ बदल चुकी थी।

यह नीरज की आवाज़ थी।

“अगर तुम यह सुन रही हो…”

“तो मैं अब यहाँ नहीं हूँ।”

“लेकिन मैं ख़त्म भी नहीं हुआ।”


2. नियम

फ़ाइल के बीच में एक अजीब खड़खड़ाहट थी। उसके बाद धीमी फुसफुसाहट—

“इस आवाज़ के तीन नियम हैं…”

“पहला—इसे अकेले सुनना।”

“दूसरा—इसे रोकने की कोशिश मत करना।”

“तीसरा—इसे आगे देना।”

स्नेहा ने घबराकर हेडफ़ोन उतार दिए। लेकिन आवाज़ अब भी कमरे में गूँज रही थी।

रेडियो बंद था।

फिर भी आवाज़ चल रही थी।


3. पहला असर

उसी दिन एक श्रोता का कॉल आया।

“मैडम… रात को जो आवाज़ आई थी…”

“वो अब मेरे सिर के अंदर चल रही है।”

“मैं सो नहीं पा रहा…”

फोन के दूसरी तरफ़ अचानक चीख सुनाई दी। लाइन कट गई।

अगली सुबह ख़बर आई—

वह आदमी अपने घर में मृत पाया गया।

टीवी रिपोर्ट में एक लाइन फिर दोहराई गई—

कानों में ब्लीडिंग, कोई बाहरी चोट नहीं।


4. आईना

स्नेहा अब डर चुकी थी। उसे हर शांत जगह में फुसफुसाहट सुनाई देती।

आईने के सामने खड़ी होती—

तो आईना देर से प्रतिक्रिया देता।

जैसे उसमें मौजूद परछाईं…

उसकी नहीं हो।

आईने से आवाज़ आई—

“तुम मुझे कब दोगी?”


5. खोज

स्नेहा ने रेडियो स्टेशन के पुराने तहखाने में खोज शुरू की।

वहाँ 1987 की एक फाइल मिली—

Project Aawaaz

नोट में लिखा था:

“मानव की अंतिम साँस की ध्वनि रिकॉर्ड की जा सकती है।”

“अगर इसे बार-बार चलाया जाए…”

“तो यह खुद को दोहराना सीख लेती है।”

स्नेहा के हाथ काँपने लगे।


6. वह सुनने वाला

उसी रात स्नेहा को नींद में लगा—

कोई उसके कान के बहुत पास खड़ा है।

“अब तुम वाहक हो…”

उसके कानों से खून टपकने लगा।

कमरे के कोने में रिकॉर्डर अपने आप ऑन हो गया।

फ़ाइल सेव हुई—

Last_Voice_003.wav


जारी रहेगा…

क्योंकि आवाज़ अब रिकॉर्ड नहीं होती…

वह इंसानों के अंदर रहती है।


महत्वपूर्ण सूचना (Terms & Conditions)

यह कहानी पूर्णतः काल्पनिक है। इसका उद्देश्य केवल मनोरंजन और रचनात्मक लेखन है। इस कहानी का किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति, समुदाय, धर्म, जाति, स्थान या वास्तविक घटना से कोई संबंध नहीं है। यह किसी भी प्रकार से किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने या नकारात्मक भावना फैलाने के लिए नहीं लिखी गई है। यदि कहानी का कोई अंश वास्तविक प्रतीत हो, तो वह मात्र संयोग है।

© सभी अधिकार सुरक्षित
लेखक: सिद्धार्थ कुमार शर्मा
वेबसाइट: मैं voiceofmemories.in

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