भूतेली हवेली की रात
भूमिका (Introduction)
धार शहर से कुछ किलोमीटर दूर एक पुरानी हवेली खड़ी थी। लोग कहते थे—यह हवेली रात में खुद बोलती है। अजीब सी आवाज़ें, चिल्लाहटें और कभी-कभी बिना किसी वजह के रोशनी।
यह कहानी उसी हवेली की है, जिसे लोग प्यार से “भूतेली हवेली” कहते हैं।
अध्याय 1: नया किरायेदार
राहुल, एक युवा फोटोग्राफर, शहर से दूर सुकून पाने आया। उसने सुना था कि हवेली तस्वीरों के लिए परफेक्ट है।
हवेली के मालिक ने कहा—
"रात में अंदर मत रहना।"
राहुल ने हँसकर कहा, "डर से क्या होगा?" लेकिन हवेली के कमरे में पहला कदम रखते ही उसे अजीब ठंडक महसूस हुई।
अध्याय 2: पहली रात
रात करीब 11 बजे राहुल को कदमों की आवाज़ सुनाई दी।
"कौन है?" उसने पूछा। जवाब में केवल हवेली की दीवारों से हल्की हँसी आई।
कैंप टॉर्च जलाकर वह कमरे के चारों ओर देखने लगा। लेकिन वहाँ कुछ भी नहीं था।
अध्याय 3: पुराने दस्तावेज़
अगले दिन राहुल ने हवेली का पुराना रजिस्टर देखा। उसमें दर्ज थे—पूर्व मालिकों के नाम, उनकी मृत्यु की तारीखें और एक ही चीज़—हर मौत रात में हुई।
हवेली ने जैसे अपने अतीत की कहानी उसे बता दी।
अध्याय 4: बुलावा
रात को अचानक एक कमरा अपने आप खुल गया। राहुल भीतर गया। कमरे में सिर्फ़ एक पुरानी तस्वीर थी—
तीन लोग, जो उस हवेली में रहते थे। लेकिन तस्वीर में उनकी आंखें खाली और डरावनी लग रही थीं।
अध्याय 5: अनजान आवाज़ें
राहुल को आवाज़ें सुनाई देने लगीं—फुसफुसाहट, किसी का रोना, कभी-कभी हँसी।
"बाहर मत जाओ…" आवाज़ बोली।
लेकिन राहुल ने हिम्मत जुटाई और कमरे में आगे बढ़ा।
अध्याय 6: दर्पण की परछाई
कमरे के एक कोने में दर्पण था। अचानक दर्पण में राहुल की परछाई नहीं थी।
बल्कि तीन और परछाइयाँ उसके पीछे खड़ी थीं।
अध्याय 7: भागना असंभव
राहुल बाहर भागा। दरवाज़ा लॉक था। खिड़कियाँ खुली नहीं थीं। हवेली ने उसे घेर लिया।
हर कमरे में वही आवाज़ें—
"हम तुम्हें भूलने नहीं देंगे।"
अध्याय 8: रहस्य का खुलासा
अगली सुबह, हवेली के मालिक ने पुलिस को बुलाया। लेकिन अंदर कोई नहीं मिला। राहुल का कोई सुराग नहीं था।
सिर्फ़ वही पुरानी तस्वीर थी, जिसमें अब चार लोग थे।
निष्कर्ष (Conclusion)
आज भी भूतेली हवेली खड़ी है। लोग कहते हैं—जो अंदर जाता है, उसका नाम हवेली की तस्वीरों में जुड़ जाता है।
क्या आप वहां रात बिताने की हिम्मत कर सकते हैं?
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Disclaimer: यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है। किसी वास्तविक व्यक्ति, स्थान या घटना से इसका कोई संबंध नहीं है।
