👻 भयानक रेलगाड़ी रात | Hindi Horror Story
भूमिका (INTRODUCTION)
भारत की सुनसान लोको पथ रेल लाइन है… जहाँ रात के समय सुनसान स्टेशन के पास एक रहस्य घूमता है। लोगों की जुबान पर एक नाम आया—भयानक रेलगाड़ी रात।
कई यात्रियों के आख़िरी लोकेशन का रिकॉर्ड 12:13 बजे सामने आया था। न कोई ट्रेन, न कोई आवाज़… सिर्फ़ एक रहस्यमयी रेलगाड़ी का अक्स जो रात के अँधेरे में दिखाई देता था।
यह कहानी उसी रात की है—जहाँ एक इन्जीनियर को उस रहस्य का सामना करना पड़ा।
अध्याय 1: ड्यूटी पर पहला दिन
अमन, एक युवा रेलवे इन्जीनियर, को सन्नाटा रोड स्टेशन पर रात की ड्यूटी मिली। यह स्टेशन जंगल के बीच था—सन्नाटा, हवाएँ, और गोल‑Gol रात की ख़ामोशी।
पहली रात, जैसे ही घड़ी 12:13 बजने को आई, दूर रेल की पटरी पर हल्की रोशनी सी झिलमिलाई। अमन ने सोचा—शायद किसी ट्रेन का लाइट है।
लेकिन जो उसने देखा… वह रोशनी किसी साधारण ट्रेन की नहीं थी।
अध्याय 2: पहली झलक
धुंधले‑से साये की तरह लोको पथ पर एक पुरानी रेलगाड़ी आ रही थी—जंगल की हवा में धीमी‑धीमी सीटी की आवाज़, लेकिन इंजन की आवाज़ बिल्कुल नहीं।
रेलगाड़ी रूकी… बिल्कुल 12:13 पर।
स्टेशन की पुरानी घड़ी अचानक उसी समय बिलकुल थम गई जैसी कोई समय को रोक रहा हो।
अमन की साँसे तेज़ हो गईं। बिना किसी चालक के, रेलगाड़ी के दरवाज़े हौले से खुले… और भीतर से एक संकेत आया—
“आओ…”
अध्याय 3: परछाइयों की आवाज़ें
जैसे ही अमन ने दरवाज़ा खोला—
भीतर से किसी की फुसफुसाहट आई—
“हम… तुम्हें देख रहे हैं…”
अमन की टॉर्च की रोशनी डिब्बों के अंदर फैलती गई। परछाइयाँ दीवारों पर घूमती रहीं—
और फिर, एक साया अचानक उसकी ओर भागा—सीधे उसकी टॉर्च लाइट में।
डिब्बों के आख़िर में एक लड़की थी—बाल टूटे हुए, आँखें ख़ाली और माथा ठंडे पसीने से तर।
अध्याय 4: लड़की की दुःखभरी कहानी
लड़की की आवाज़ इतनी धीमी थी, पर स्पष्ट आवाज़ आई—
“मुझे… वापिस भेज दो…”
उसने बताया कि वह इसी रेलगाड़ी में फँसी हुई है—
जो यात्रियों को अनजाने दुनिया में ले जाती है…
और वहाँ से लौटने को कोई रास्ता नहीं मिलता।
हर रात 12:13 बजे, यह रेलगाड़ी उसी स्टेशन पर प्रकट होती है—
जो कोई भी उसी समय ड्यूटी पर हो…
उसकी परछाईं भी उस भूतिया धुन में शामिल हो जाती है।
अध्याय 5: रेलगाड़ी का नियम
लड़की ने गंभीर स्वर में कहा—
“जो रात 12:13 बजे तक स्टेशन पर होता है, वह हमारी रेलगाड़ी में बैठ जाता है…”
यह सुनकर अमन की सांस अटक गई। वह भागने लगा,
लेकिन नेटवर्क वहाँ बिल्कुल नहीं था।
मोबाइल फ़ोन की स्क्रीन में सिर्फ़ स्टेशन की लाइन, पर कहीं कोई सिग्नल नहीं।
उसने भागने की कोशिश की—पर जैसा ही उसने पीछे मुड़ा…
रेलगाड़ी की रोशनी और तेज़ हो गई।
अध्याय 6: परछाइयों का घेराव
जैसे‑जैसे घड़ी 12:14 के करीब आई…
धुंधले साये अमन के आसपास इकट्ठे होने लगे।
उनके हाथ फैलकर उसकी ओर बढ़े…
जैसे कोई रास्ता न बचा हो।
फिर अचानक सब कुछ शांत हो गया—
पर रेलगाड़ी वहाँ से गायब।
अध्याय 7: सुबह की हैरत
सुबह स्टेशन मास्टर आया तो उसने देखा—
अमन वहीं पसीना बहाता खड़ा था।
उसने बताया कि क्या हुआ…
लेकिन स्टेशन मास्टर ने सिर हिला कर कहा—
“यहाँ रात में कोई ट्रेन नहीं थी।”
फिर अमन ने अपनी जेब में देखा—
एक टिकट थी—
जिस पर लिखा था—
“12:13 — सन्नाटा रोड स्टेशन”
अध्याय 8: रिकॉर्ड में विचित्रता
स्टेशन मास्टर के पास कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
न ट्रेन नंबर, न समय…
बस अप्रत्याशित टिकट।
अमन को एहसास हुआ कि यह सब सिर्फ़ भ्रम नहीं था।
यह एक वास्तविक घटना का हिस्सा था—
जो हर रात दस्तक देती है।
अध्याय 9: फिर से 12:13
अगली रात, अमन की नींद टूट गई—
घड़ी खुद‑ब‑खुद 12:13 पर रुक गई।
उसने खिड़की से बाहर देखा—
रेलवे पटरी पर हल्की रोशनी फिर से दिखाई दी।
हवा में किसी आवाज़ ने कहा—
“हम फिर आ रहे हैं…”
निष्कर्ष (CONCLUSION)
भयानक रेलगाड़ी रात सिर्फ़ एक कहानी नहीं है—
यह रेलगाड़ी हर रात 12:13 बजे प्रकट होती है,
और अपनी भूतिया यात्रियों की परछाइयों को जोड़ लेती है।
अगर आप उस रात वहाँ ड्यूटी पर हैं…
क्या आपकी परछाईं भी उस भूतिया धुन का हिस्सा बन जाएगी?
