छलावा – भूत की कहानी | छलावा भूत क्या होता है?

 

छलावा – भूत की कहानी 




भूमिका (Introduction)

छोटे शहर में लोग कहते थे कि पुरानी हवेली के पीछे हमेशा कुछ अजीब होता है। रात होते ही वहां अजीब shadows और अचानक आवाज़ें सुनाई देती थीं। किसी ने कभी उसे देखा, लेकिन कोई समझ नहीं पाया कि असल में वहां क्या है। यह कहानी उसी भूतिया छलावे की है।


अध्याय 1: नया आगंतुक

आर्यन, एक कॉलेज छात्र, अपने दोस्तों के साथ उस हवेली के पास गया। वह डरावनी कहानियों में विश्वास नहीं करता था।

जैसे ही वह हवेली के पास पहुँचा, उसे लगा कि कहीं से किसी की निगाहें उसे देख रही हैं।


अध्याय 2: पहला अनुभव

हवेली के अंदर आर्यन ने देखा—एक पुरानी तस्वीर जिसमें सभी चेहरों पर मुस्कान थी। लेकिन तस्वीर के पीछे एक धुंधली परछाई घूम रही थी।

आर्यन को लगा—क्या यह उसकी आँखों का छलावा है, या सच में कुछ है?


अध्याय 3: फुसफुसाहटें

रात के 12 बजे, हवेली में हल्की फुसफुसाहटें शुरू हुई।

"हम देख रहे हैं…"

आर्यन ने दोस्तों को देखा, लेकिन वे सो रहे थे। वह अकेला था, लेकिन आवाज़ें बिल्कुल पास लग रही थीं।


अध्याय 4: परछाई का खेल

आर्यन ने टॉर्च जलाई। परछाई दीवारों पर फैल गई। अचानक उसने देखा—परछाई उसके रूप में बदल गई।

हवेली ने उसका रूप ले लिया।


अध्याय 5: असली छलावा

अगली सुबह जब वह जागा, तो पाया कि हवेली के सारे कमरे खाली थे। लेकिन बाहर उसने देखा—उसकी झूठी परछाई, तस्वीर में बंद हो गई थी।

हवेली अब उस पर नजर रख रही थी।


निष्कर्ष (Conclusion)

छलावा सिर्फ़ आँखों का नहीं होता, कभी-कभी वह भूत का रूप भी ले लेता है।

हवेली अब भी खड़ी है। रात में जो भी अंदर जाता है, उसकी परछाई हमेशा हवेली के भूतिया खेल का हिस्सा बन जाती है।


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Disclaimer: यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है। किसी वास्तविक व्यक्ति, स्थान या घटना से इसका कोई संबंध नहीं है।

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