सिमडेगा हॉस्टल का रोता हुआ भूत | बच्चे की मौत से जुड़ी एक भयानक सच्चाई |

 

सिमडेगा हॉस्टल का रोता हुआ भूत

(बच्चे की मौत से जुड़ी एक भयानक सच्चाई)

लेखक: सिद्धार्थ कुमार शर्मा
वेबसाइट: Voice of Memories.in




भूमिका 

झारखंड का सिमडेगा ज़िला अपने शांत माहौल, पहाड़ियों और आदिवासी संस्कृति के लिए जाना जाता है।
लेकिन इसी शांत ज़िले में एक ऐसा सरकारी हॉस्टल है, जिसकी कहानी आज भी लोगों के रोंगटे खड़े कर देती है।

कहा जाता है कि वहाँ एक छोटे बच्चे की मौत हुई थी…
और उसी की आत्मा आज भी रात में
रोती हुई आवाज़ में बच्चों को बुलाती है।

यह कहानी सिर्फ अफ़वाह नहीं है।
यह उन बच्चों की यादों से बनी है,
जो आज भी उस हॉस्टल का नाम सुनकर काँप उठते हैं।


सिमडेगा का वह सरकारी हॉस्टल

सिमडेगा शहर से थोड़ी दूरी पर, जंगल के पास बना हुआ एक पुराना छात्रावास
दो मंज़िला इमारत,
पीली दीवारें,
और हमेशा बंद रहने वाला पिछला कमरा

दिन में सब ठीक लगता था।
लेकिन जैसे ही रात होती—

पूरा हॉस्टल किसी अनदेखे डर से भर जाता।


वह बच्चा… जिसकी मौत हुई

उस बच्चे का नाम था अमन
उम्र सिर्फ 10 साल

अमन बहुत शांत था।
कम बोलता,
लेकिन हमेशा मुस्कुराता।

एक रात अमन को तेज़ बुखार था।
उसने वार्डन से कहा—

“सर… मुझे कोई बुला रहा है…”

वार्डन ने ध्यान नहीं दिया।

उसी रात…
अमन की रहस्यमयी मौत हो गई।


मौत के बाद शुरू हुई अजीब घटनाएँ

अमन की मौत को डॉक्टरों ने “नेचुरल” बताया।
लेकिन उसके बाद—

हॉस्टल में अजीब चीज़ें होने लगीं।

  • रात 2 बजे किसी बच्चे के रोने की आवाज़

  • बाथरूम के पास गीले पैरों के निशान

  • बच्चों को नींद में कोई हिला देता

  • और बार-बार एक आवाज़—

“मुझे घर जाना है…”


भूत की पहली झलक

एक रात, कक्षा 6 के तीन बच्चों ने एक साथ देखा—

कॉरिडोर में
एक छोटा सा साया खड़ा था।

  • स्कूल की ड्रेस

  • झुका हुआ सिर

  • और आँखों से बहता हुआ काला पानी

वह साया धीरे-धीरे चलता हुआ
अमन के पुराने बिस्तर के पास जाकर
गायब हो गया।


डर से पागल होते बच्चे

कुछ ही दिनों में—

  • बच्चे खाना छोड़ने लगे

  • रात को पेशाब कर देते

  • नाम पुकारने पर जवाब नहीं देते

हर बच्चा एक ही बात कहता—

“वो बच्चा हमें बुलाता है…
वो रोता है…”


हॉस्टल के पीछे का सच

एक सफ़ाईकर्मी महिला ने सच्चाई बताई—

अमन की मौत लापरवाही से हुई थी।
उसे समय पर अस्पताल नहीं ले जाया गया।

मरने से पहले वह लगातार रो रहा था—

“माँ… मुझे घर ले चलो…”

लोगों का मानना है—
उसकी आत्मा उसी दर्द में अटकी हुई है।


सबसे डरावनी रात

एक अमावस्या की रात—

पूरे हॉस्टल में बिजली चली गई।

अचानक सभी बच्चों ने सुना—

एक साथ रोने की आवाज़

कॉरिडोर में खड़ा था
एक छोटा बच्चा…

उसका चेहरा पीला,
आँखें खाली,
और आवाज़ बेहद दर्दनाक—

“तुम लोग क्यों सो रहे हो…
मुझे तो नींद नहीं आती…”


तांत्रिक और अंतिम पूजा

डरे हुए प्रबंधन ने एक ओझा को बुलाया।

पूजा के दौरान
अमन की आवाज़ गूंज उठी—

“मुझे माँ के पास जाना है…”

जैसे ही मंत्र पूरे हुए—

तेज़ हवा चली
और पूरा हॉस्टल काँप उठा।

सुबह सब शांत था।


हॉस्टल का आज का हाल

उस घटना के बाद—

  • उस हॉस्टल का एक हिस्सा सील कर दिया गया

  • अमन का कमरा आज भी बंद है

  • कोई बच्चा वहाँ नहीं रहता

लेकिन स्थानीय लोग कहते हैं—

आज भी
बरसात की रातों में
वहाँ से बच्चे के रोने की आवाज़ आती है।


क्या अमन की आत्मा अब भी है?

कुछ लोग कहते हैं—
वह मुक्त हो चुका है।

कुछ कहते हैं—
वह अब भी
किसी बच्चे को घर जाने का रास्ता ढूंढता है।

सच क्या है…
कोई नहीं जानता।


निष्कर्ष (Conclusion)

सिमडेगा हॉस्टल का भूत हमें याद दिलाता है—
कि लापरवाही
कभी-कभी किसी मासूम आत्मा को
हमेशा के लिए बाँध देती है।

अगर आपको ऐसी सच्ची, भावनात्मक और डरावनी कहानियाँ पसंद हैं,
तो पढ़ते रहिए—

👉 Voice of Memories.in
जहाँ डर भी एक याद बन जाता है।

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